Saturday, January 22, 2011

मेरा देश महान है.. (On Kargil War 1999)

छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है
बस कपड़े के बने तिरंगे में अमर प्राण है ।
छाती ठोक के ............................. महान है ॥
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मौका अच्छा पाकर दुश्मन घुस आया घर के अन्दर
आया था सपने में की कश्मीर लेकर जायेगा
लौट के अपने मुल्क में वापिस इज्ज़त बहुत कमाएगा
बेचारे की किश्मत देखो कुदरत के क्या खेल किया
उसको ज़रा दिखाके लालच शेर के घर में भेज दिया
भूल गया था नादा की भारत में वीर जवान है
छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है।।
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सौरभ* और उसके साथी कर गए एक अनोखा काम
वोह ना कभी भी मिट सकते, हो गए अमर है उनके नाम
हस्ते हस्ते उन वीरो ने अकल्पनीय सा दर्द सहा
टुकड़े टुकड़े होने पर भी मुह से होगा उफ़ न कहा
मर जाना पर कभी न झुकना यही हमारी शान है
छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है
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माँ के ऊपर बन आई तो सबकी भोहे तन गयी
पर घुसपैठी दुश्मन की तो जान पर थी बन गयी
घर वालो का मोह न देखा, चल दिए सीमा पर जवान
हर देश में थोड़े हीरे होंगे, भारत है हीरो की खान
हम पर यु मिट जाने वाले, क्या यह ही भगवान् है ?
छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है ।
छाती ठोक के केहता हु की मेरा देश महान है ।।
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* This is the refered to Lt. Saurabh Kalia, who with his team was abducted from the border and later there multilated bodies were returned to India from Pakistan.

Sunday, February 07, 2010

Darakhth

ज़न्नत और कयामत के बीच, अब बस कुछ दरख्त खड़े है
वोह हमसे बड़े या हम उनसे बड़े है...

हमे आशिया देने को, कितने गुलशन तबाह हुए
हमारी किश्तिय खेने को, कितने घर कुरबा हुए
"होली", "लोहड़ी" के नाम पे, कितने सपनो को राख किया
खेती के लालच में, पुरे जंगल को खाक किया

आज माज़रा यह है की, सांसो के भी लाले पड़े है
वोह हमसे बड़े या हम उनसे बड़े है...

दरख्तों में भी जान है, इसमें कोई शक नहीं
गर हम सब बीज नहीं बोते, तो काटने का भी हक नहीं
अब भी यह चीख नहीं सुनी, तो सब इस कत्ल का गुनाह लेंगे
अपने लापरवाही की बहुत बड़ी कीमत देंगे।

न जाने ज़मी के ज़हन में और कितने खंज़र जड़े है
वोह हमसे बड़े या हम उनसे बड़े है... .

Thursday, October 25, 2007

Mitti Ki Kahani

Mitti leke toadd liya
sab dhelo* ko phod liya
Mitti ko phir chaan liya
Paani daal ke saan liya
Chaak chalaya tezi se
Haath hilaya tezi se
Mitti ko aakar diya
Do haantho.N ka pyar diya
Phir Mitti chal di jalne ko
Pakk ke pakki ban.ne ko
Kaisi Mitti ki kaya hai
Yu Jalke jeevan paaya hai
Ab Mitti kaam ko jayegi
apne sam.manN ko jayegi
Mitti ne mann se kaam kiya
Thoda thehra aaraam kiya
Phir kismat usse rooth gayi
Mitti bas gir ke toot gayi
Usko naa hardam phirna tha
ek din haantho.N se girna tha
Ab Mitti ka koi mol nahi
toote tukdo.N ka tol nahi
Bas baat yahi batlaani hai
Ek choti si kahaani hai
Mitti ko jeevan paana hai
Phir Mitti mei mil jaana hai

[* Dhelo = Mitti ke jamei hue chote chote tukde]

Saturday, June 03, 2006

Aaj phir woh aayi..





Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi
Bechaini ke silsille ki shuruaat kar gayi

Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi

Bade garv se mujhko apna dost kehti hai
meri baatein sunn ke Muskuraati rahti hai
usse milke mujhko kya kuch khona padta hai
Nahi jaanti raat ko us din rona padta hai

yahi haadsa aaj bhi mere saath kar gayi
Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi

Itni achchi hai ki usko bura mai kah nahi sakta
bechain huu, kyonki uske bina mai rah nahi sakta
hum zameen ke waasi sitaro ki chah karte hai
woh jagmagate rahte hai aur hum aah bharte hai

Mere kalpanao ke dunia ko barbaad kar gayi
Aaj phir woh aayi aur huske baat kar gayi....

ओश की एक बूँद....

ओश की एक बूँद जैसे सूखे दिन के ताप से
जम गए सब आंसू मेरे यु ही अपने आप से
जो पड़ा है वज्र मुझपे तो मै गम को क्यों सहु
रोते होंगे दुनिया वाले मै भी क्यों रोता रहू
देखा मैंने काफी जीवन बात इतनी साफ़ है
जो भी पाना जो भी खोना, करना अपने आप है
बढ़ गए जो सारे आगे, तो मै क्यों पीछे रहू
दे तस्सली दिल को अपने आँखे क्यों सीचे रहू
जो मै जाऊ हार फिर भी सोचु कैसे हारा मै
कर न पाऊ एक पल भी हार को गवारा मै
फिर मै दौडू और बल से जीत के दिखलाऊंगा
क्या बना है लख्श्य ऐसा, जिसको मै न पाउँगा
मुह छुपा के सोने वालो में न मेरा नाम हो
काम अपना करते जाना बस यह मेरा काम हो
मोह इतना बाँट पाऊं, दिल को सबके जीत लू
दे सकू मै सबको गर्मी, उसके बदले शीत लू
जो मरू मै लोग बोले, क्या अनर्थ हो गया
ऐसा लगता है की दिल का कोई हिस्सा को गया
जो करू मै सत्य ये सब तब ही मेरा अर्थ है
वर्ना रहना इस जाहाँ में काम काफी व्यर्थ है।